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tasveer

u0022व्यक्तित्वu0022

u003cstrongu003eइन बाज़ारी खुशबुओं से u003cbru003eसिर्फ़ लिबास महकते हैं u003cbru003eu003cbru003eमहकते लिबास की खुशबूओं से u003cbru003eसिर्फ़ बेवकूफ़ बहकते हैं u003cbru003eu003cbru003eरूह बिना तो जिस्म भीu003cbru003eबदबूदार हो जाते हैं….u003c/strongu003e

prem

u0022प्रेमu0022

u003cstrongu003eये पिंजरा है ज़रूरत का u003cbru003eस्वतंत्र तुम्हें देख सकता नहीं u003cbru003eजकड़ता है कर्तव्य की बेड़ियों में u003cbru003eसशक्त तुम्हें करता नहीं u003cbru003eu003cbru003eजो जकड़ता है वो प्रेम नहीं u003cbru003eजो भटकता है वो प्रेम नहीं u003cbru003eजो तड़पता है एक झलक को….u003c/strongu003e

udhar

u0022उधारu0022

u003cstrongu003eबारिश से कह दो u003cbru003eकुछ बूंदें उधार दे दे, मुरझाए हुए पौधों को u003cbru003eजीवन का उपहार दे दे, u003cbru003eu003cbru003eऊष्मा से तड़पते पक्षियों को u003cbru003eखुशियों की बौछार दे दे, u003cbru003eu003cbru003eरोते हुए चेहरों पर भी u003cbru003eमुस्कान की बहार दे देu003cbru003e….u003c/strongu003e

tasveer

u0022तस्वीरu0022

u003cstrongu003eज़िन्दगी की तस्वीर के कुछ अंश धुंधले होते जा रहे हैं, u003cbru003eसफ़र की शुरुआत जहां से हुई u003cbru003eवो लम्हे अतीत के आग़ोश में खोते जा रहे हैं u003cbru003eu003cbru003eu003cbru003eसफ़र में आगे बढ़ते हुए u003cbru003eकुछ नए अंश भी जुड़ते जा रहे हैं u003cbru003eकिंकर्तव्यविमूढ़ हुआ जाता है मन u003cbru003eक्या करूं क्या नहीं….u003c/strongu003e

prem

u0022कोशिशu0022